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अमेरिका का विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) से औपचारिक रूप से बाहर होना: फंडिंग, बकाया और वैश्विक स्वास्थ्य पर असर

डीडब्ल्यू के अनुसार अमेरिका ने विश्व स्वास्थ्य संगठन से औपचारिक रूप से अलग होने की प्रक्रिया पूरी कर ली है। यह कदम 2025 में किए गए निर्णय के एक साल बाद प्रभावी हुआ। रिपोर्ट में फंडिंग रोकने, कथित बकाया राशि और WHO पर वित्तीय दबाव जैसे मुद्दे सामने आते हैं।

दैनिक समाचार न्यूज़ डेस्क

क्या हुआ: WHO से अमेरिकी अलगाव औपचारिक रूप से लागू

डीडब्ल्यू की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) से औपचारिक रूप से अलग होने की प्रक्रिया पूरी कर ली है। रिपोर्ट बताती है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2025 में अपने कार्यकाल के पहले दिन एक कार्यकारी आदेश के ज़रिए WHO छोड़ने की दिशा में कदम बढ़ाया था, और कानूनी तौर पर एक साल का नोटिस आवश्यक होने के कारण अब यह निर्णय प्रभावी हुआ।

अमेरिका का विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) से औपचारिक रूप से बाहर होना: फंडिंग, बकाया और वैश्विक स्वास्थ्य पर असर
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कारण और बयान

खबर में कहा गया है कि अमेरिका ने WHO पर कोविड-19 सहित वैश्विक स्वास्थ्य संकटों को संभालने के तरीके को लेकर आलोचना की, और इसी पृष्ठभूमि में बाहर निकलने का तर्क दिया गया। डीडब्ल्यू के अनुसार अमेरिकी प्रशासन ने यह भी कहा कि आगे का जुड़ाव मुख्य रूप से अलगाव को औपचारिक रूप से पूरा करने और अमेरिकी नागरिकों के स्वास्थ्य-सुरक्षा हितों को सुरक्षित रखने तक सीमित रहेगा।

फंडिंग और बकाया का विवाद

रिपोर्ट में WHO के हवाले से कहा गया है कि अमेरिका की ओर कुछ कानूनी वित्तीय दायित्व/बकाया राशि का मुद्दा भी सामने है, जिसे लेकर दोनों पक्षों के दावों में मतभेद दिखता है। साथ ही यह भी बताया गया है कि अमेरिका historically WHO का एक बड़ा वित्तीय योगदानकर्ता रहा है और उसके हटने से संगठन पर बजट दबाव बढ़ा तथा आंतरिक कटौती जैसे कदम उठाने पड़े।

वैश्विक असर: निगरानी, आपातकाल और समन्वय

WHO वैश्विक रोग-निगरानी, महामारी तैयारी और स्वास्थ्य आपातकाल के समन्वय की केंद्रीय संस्था मानी जाती है। ऐसे में अमेरिका के बाहर जाने से अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य तंत्र में नेतृत्व, संसाधन और कार्यक्रमों की निरंतरता को लेकर सवाल उठेंगे। आने वाले महीनों में यह स्पष्ट होगा कि टीकाकरण, निगरानी नेटवर्क, आपातकालीन प्रतिक्रिया और शोध-सहयोग पर व्यावहारिक असर कितना पड़ता है।

स्रोत पुस्तिका

  1. Deutsche WelleDeutsche Welle