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गणतंत्र दिवस पर विपक्ष की संवैधानिक ‘रक्षा’ की अपील: राहुल गांधी और खड़गे ने संविधान को केंद्र में रखा

26 जनवरी 2026 को गणतंत्र दिवस के मौके पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे ने संविधान की रक्षा पर जोर दिया। राहुल गांधी ने संविधान को नागरिक अधिकारों की ‘ढाल’ बताया, जबकि पार्टी नेतृत्व ने इस दिन को केवल परेड-भाषण नहीं, बल्कि संवैधानिक मूल्यों के पालन की कसौटी बताया।

दैनिक समाचार न्यूज़ डेस्क

26 जनवरी 2026 (सोमवार) को 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर देश में जहां कर्तव्य पथ पर परेड और समारोहों का आयोजन हुआ, वहीं राजनीति के स्तर पर भी संविधान की भूमिका को लेकर संदेश सामने आए। कांग्रेस के प्रमुख नेताओं—लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे—ने गणतंत्र दिवस शुभकामनाओं के साथ संविधान की ‘रक्षा’ और उसके मूल्यों को केंद्र में रखने की अपील की। ([outlookindia.com](https://www.outlookindia.com/national/republic-day-rahul-gandhi-kharge-stress-defence-of-constitution?utm_source=openai))

गणतंत्र दिवस पर विपक्ष की संवैधानिक ‘रक्षा’ की अपील: राहुल गांधी और खड़गे ने संविधान को केंद्र में रखा
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राहुल गांधी का संदेश: संविधान ‘आवाज़’ और ‘अधिकारों की ढाल’

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पोस्ट में संविधान को हर भारतीय का सबसे बड़ा ‘हथियार’ बताते हुए कहा कि यह नागरिकों की आवाज़ है और अधिकारों की सुरक्षा करने वाली ढाल है। उनके मुताबिक गणतंत्र की मजबूती इसी आधार पर टिकती है और यह तभी मजबूत होगा जब समानता और सद्भाव को प्राथमिकता दी जाएगी। यह संदेश पार्टी की उस राजनीतिक लाइन से भी जुड़ता है जिसमें वह ‘संविधान बचाओ’ को केंद्रीय नैरेटिव के तौर पर आगे रखती रही है। ([outlookindia.com](https://www.outlookindia.com/national/republic-day-rahul-gandhi-kharge-stress-defence-of-constitution?utm_source=openai))

खड़गे ने भी गणतंत्र दिवस को केवल रस्मी आयोजन तक सीमित न मानते हुए संविधान और संस्थाओं की मजबूती पर जोर दिया। रिपोर्ट के अनुसार, कांग्रेस नेतृत्व ने इस दिन को स्वतंत्रता-आंदोलन की विरासत और संविधान निर्माताओं के मूल्यों के सम्मान के तौर पर प्रस्तुत किया और नागरिकों से संवैधानिक आदर्शों के प्रति प्रतिबद्ध रहने का आह्वान किया। ([outlookindia.com](https://www.outlookindia.com/national/republic-day-rahul-gandhi-kharge-stress-defence-of-constitution?utm_source=openai))

राजनीतिक संदर्भ: प्रतीकात्मक दिन, वास्तविक बहस

गणतंत्र दिवस भारत के संविधान के लागू होने (26 जनवरी 1950) की वर्षगांठ है, इसलिए इस दिन ‘संविधान’ शब्द राजनीतिक संदेशों में स्वाभाविक रूप से केंद्र में आता है। लेकिन 2026 में यह चर्चा केवल औपचारिकता नहीं रही—विपक्षी दल इसे नागरिक अधिकार, संस्थागत संतुलन और लोकतांत्रिक मूल्यों से जोड़कर एक व्यापक राजनीतिक बहस में भी बदलते दिखे। ([outlookindia.com](https://www.outlookindia.com/national/republic-day-rahul-gandhi-kharge-stress-defence-of-constitution?utm_source=openai))

आगे की तस्वीर

एक तरफ परेड और राष्ट्रीय समारोहों में राज्य की शक्ति, सुरक्षा और सांस्कृतिक पहचान का प्रदर्शन होता है, दूसरी तरफ राजनीतिक दल गणतंत्र दिवस को संवैधानिक प्रतिबद्धता के प्रतीक के रूप में इस्तेमाल करते हैं। 26 जनवरी 2026 को भी यही दो धाराएं साथ-साथ दिखीं—सरकारी समारोह और विपक्ष के संवैधानिक संदेश—जो मिलकर गणतंत्र दिवस की बहुस्तरीय राजनीतिक-सामाजिक प्रकृति को उजागर करते हैं। ([outlookindia.com](https://www.outlookindia.com/national/republic-day-rahul-gandhi-kharge-stress-defence-of-constitution?utm_source=openai))

स्रोत पुस्तिका

  1. Outlook India (PTI)Outlook India (PTI)