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वसुंधरा राजे: राजनीति में पहचान बनाने के लिए महिलाओं को पुरुषों से तीन गुना ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है

जयपुर में एक कार्यक्रम के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने कहा कि राजनीति में महिलाओं को पुरुषों के मुकाबले अधिक संघर्ष और मेहनत करनी पड़ती है। उन्होंने शिक्षा और प्रतिनिधित्व बढ़ाने पर जोर दिया।

दैनिक समाचार न्यूज़ डेस्क

राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने जयपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी और चुनौतियों पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि राजनीति में जगह बनाने के लिए महिलाओं को पुरुषों की तुलना में तीन गुना ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है और लगातार खुद को साबित करना पड़ता है। राजे के मुताबिक, महिला सशक्तिकरण का अर्थ सिर्फ नारों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि नेतृत्व और निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में बराबरी का प्रतिनिधित्व भी जरूरी है।

वसुंधरा राजे: राजनीति में पहचान बनाने के लिए महिलाओं को पुरुषों से तीन गुना ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है
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राजे ने यह भी संकेत दिया कि बीते दशकों में महिला शिक्षा और महिलाओं की सामाजिक भूमिका में सुधार आया है, लेकिन राजनीति में प्रतिनिधित्व अब भी अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंचा है। उनके अनुसार, महिलाओं को पहचान और अवसर मिलने की राह में कई व्यावहारिक बाधाएं रहती हैं—जैसे सामाजिक अपेक्षाएं, परिवार व समाज का दबाव, और राजनीतिक संरचना में पुरुष-प्रधान माहौल।

कार्यक्रम में राजे ने शिक्षा को महिलाओं की सफलता की कुंजी बताते हुए कहा कि राजनीतिक और सामाजिक सशक्तिकरण के लिए ज्ञान, आत्मविश्वास और निरंतर तैयारी जरूरी है। उन्होंने महिलाओं से आगे आने, नेतृत्व की भूमिका निभाने और अपनी बात मजबूती से रखने का आह्वान किया। उनके अनुसार, बदलाव तभी टिकाऊ होगा जब महिलाओं की भागीदारी सिर्फ संख्या तक सीमित न रहे, बल्कि नीति और निर्णय प्रक्रिया में वास्तविक भूमिका में बदले।

उन्होंने यह भी कहा कि महिलाओं की मेहनत और संघर्ष को सिर्फ व्यक्तिगत स्तर पर नहीं देखा जाना चाहिए—यह एक संरचनात्मक चुनौती है, जिसे पार्टियों के टिकट वितरण, नेतृत्व की ट्रेनिंग और समान अवसरों के माहौल से बेहतर किया जा सकता है।

राजे का यह बयान ऐसे समय में आया है जब देशभर में महिला प्रतिनिधित्व, राजनीति में अवसर और कार्यस्थलों में लैंगिक समानता जैसे मुद्दों पर चर्चा तेज है। उनका संदेश यह रहा कि महिलाओं को आगे बढ़ने के लिए अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ रही है, लेकिन यही मेहनत उन्हें पहचान और स्थायी स्थान दिलाने में भी मदद कर सकती है—बशर्ते संस्थागत समर्थन और अवसरों का ढांचा मजबूत किया जाए।

स्रोत पुस्तिका

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