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उत्तर कोरिया का बैलिस्टिक मिसाइल परीक्षण, वेनेजुएला पर कथित हमले की निंदा भी

उत्तर कोरिया ने समुद्र की ओर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। विश्लेषकों के मुताबिक यह कदम क्षेत्रीय संदेश देने के साथ-साथ वेनेजुएला में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई को लेकर बढ़े तनाव से भी जुड़ सकता है।

दैनिक समाचार न्यूज़ डेस्क

4 जनवरी 2026 को उत्तर कोरिया ने समुद्र की दिशा में बैलिस्टिक मिसाइलें लॉन्च कीं, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा चिंताएं फिर बढ़ गईं। रिपोर्टों के मुताबिक प्योंगयांग का यह परीक्षण ऐसे समय पर हुआ है जब कई देशों में भू-राजनीतिक तनाव और अलग-अलग मोर्चों पर सैन्य गतिविधियां चर्चा में हैं। इस कदम को लेकर दक्षिण कोरिया, जापान और अमेरिका के सुरक्षा विश्लेषक मिसाइल क्षमता, रेंज और राजनीतिक संदेश—तीनों स्तरों पर आकलन करते नजर आए।

उत्तर कोरिया का बैलिस्टिक मिसाइल परीक्षण, वेनेजुएला पर कथित हमले की निंदा भी
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खबरों में बताया गया कि इससे पहले भी उत्तर कोरिया ने 7 नवंबर 2025 को बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्च किया था। उस समय के परीक्षण को भी क्षेत्रीय घटनाक्रम से जोड़कर देखा गया था। ताजा परीक्षण के संदर्भ में कई विश्लेषकों ने यह संभावना जताई कि प्योंगयांग अपने रणनीतिक साझेदारों और विरोधियों—दोनों को एक साथ संदेश देना चाहता है: एक तरफ सैन्य तैयारी का प्रदर्शन, दूसरी तरफ कूटनीतिक दबाव की क्षमता।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि उत्तर कोरिया ने वेनेजुएला में डॉनल्ड ट्रंप प्रशासन की सैन्य कार्रवाई/कथित कार्रवाई की निंदा की है। उत्तर कोरिया लंबे समय से वेनेजुएला की मादुरो सरकार का सहयोगी रहा है, और इसलिए वेनेजुएला में किसी भी बड़े घटनाक्रम पर प्योंगयांग की प्रतिक्रिया को उसकी व्यापक विदेश नीति के संकेत के तौर पर भी देखा जाता है।

विश्लेषकों का एक वर्ग मानता है कि उत्तर कोरिया अक्सर मिसाइल परीक्षणों का समय ऐसे चुनता है जब वैश्विक एजेंडे पर संकट या ध्यान-भटकाव मौजूद हो। इसका लक्ष्य अपने कार्यक्रमों पर नियंत्रण बनाए रखना, घरेलू स्तर पर शक्ति का संदेश देना, और अंतरराष्ट्रीय बातचीत में अपनी कीमत बढ़ाना हो सकता है। हालांकि इन उद्देश्यों पर देशों के बीच व्याख्याएं अलग-अलग रहती हैं।

क्षेत्रीय स्तर पर, ऐसे परीक्षण समुद्री सुरक्षा, विमानन मार्गों और सैन्य सतर्कता को प्रभावित करते हैं। संबंधित देशों की सेनाएं आमतौर पर निगरानी और अलर्ट बढ़ाती हैं, और राजनयिक चैनलों के जरिए भी विरोध दर्ज कराया जाता है। ऐसे में यह सवाल अहम है कि क्या आने वाले दिनों में और परीक्षण होंगे, या फिर प्योंगयांग किसी अलग तरह की बातचीत/समझौते की दिशा में संकेत देगा।

वर्तमान परिस्थिति में उत्तर कोरिया का मिसाइल परीक्षण केवल कोरियाई प्रायद्वीप तक सीमित विषय नहीं रह जाता। वेनेजुएला जैसे दूरस्थ संकट-क्षेत्रों पर प्रतिक्रिया जोड़कर यह संकेत मिलता है कि अलग-अलग भू-भागों के संकट एक-दूसरे के साथ राजनीतिक रूप से जुड़कर वैश्विक ध्रुवीकरण को तेज कर सकते हैं।

आने वाले सप्ताहों में यह देखा जाएगा कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस परीक्षण को लेकर किस तरह का सामूहिक रुख बनता है और क्या कोई नया कूटनीतिक दबाव, प्रतिबंधों की बहस या बातचीत की कोशिश सामने आती है। फिलहाल, प्योंगयांग ने परीक्षण के जरिए एक बार फिर यह दिखा दिया है कि वह वैश्विक घटनाक्रम के बीच भी अपने एजेंडे को केंद्र में लाने की क्षमता रखता है।

स्रोत पुस्तिका

  1. DW हिंदीDW हिंदी