सूडान युद्ध के 1000 दिन: WHO ने चेताया—स्वास्थ्य व्यवस्था चरमराई, रोग प्रकोप बढ़े
WHO के अनुसार सूडान में संघर्ष के 1000 दिन पूरे होने पर स्वास्थ्य और मानवीय संकट गहराता जा रहा है। लाखों लोगों को स्वास्थ्य सहायता चाहिए, बड़ी संख्या में विस्थापन हुआ है और हैजा, डेंगू, मलेरिया व खसरे जैसी बीमारियों के प्रकोप फैल रहे हैं।
1000 दिन के संघर्ष ने सूडान को ‘सबसे बड़ा मानवीय संकट’ क्यों बनाया
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने 9 जनवरी 2026 की एक समाचार विज्ञप्ति में बताया कि सूडान में संघर्ष 1000 दिन का हो चुका है और इसके चलते देश दुनिया के सबसे गंभीर स्वास्थ्य व मानवीय संकटों में गिना जा रहा है। WHO के मुताबिक, 20 मिलियन से अधिक लोगों को स्वास्थ्य सहायता की जरूरत है, जबकि बड़ी आबादी भोजन असुरक्षा का सामना कर रही है। लगभग तीन वर्षों की हिंसा, पहुंच-सीमाएं और फंडिंग में कमी ने संकट को और जटिल बनाया है।

स्वास्थ्य ढांचे पर असर: अस्पताल बंद, सप्लाई कम, कर्मियों की कमी
WHO ने कहा कि लगातार लड़ाई और स्वास्थ्य सेवाओं पर हमलों के कारण चिकित्सा ढांचा बुरी तरह प्रभावित हुआ है। संस्था के अनुसार, बड़ी संख्या में स्वास्थ्य केंद्र/सुविधाएं काम नहीं कर पा रही हैं, जिससे लाखों लोगों को आवश्यक और जीवनरक्षक सेवाएं नहीं मिल रहीं। साथ ही दवाइयों, जरूरी सामग्री और स्वास्थ्य कर्मियों की कमी भी एक बड़ा कारण बन रही है कि इलाज की क्षमता घट रही है।
रोग प्रकोप: हैजा, डेंगू, मलेरिया और खसरा
WHO के अनुसार खराब रहने की स्थितियां, भीड़भाड़ वाले विस्थापन स्थल, सुरक्षित पानी और स्वच्छता सेवाओं तक सीमित पहुंच तथा नियमित टीकाकरण व्यवस्था में टूट-फूट से संक्रामक रोग तेजी से फैल रहे हैं। संस्था ने बताया कि वह हैजा, डेंगू, मलेरिया और खसरे के प्रकोपों के जवाब में सरकार व साझेदार संगठनों के साथ काम कर रही है।
विस्थापन और पहुंच की चुनौती: राहत कार्य क्यों मुश्किल
WHO ने यह भी रेखांकित किया कि विस्थापन का पैमाना असाधारण है और कई क्षेत्रों में असुरक्षा के कारण मानवीय पहुंच बाधित रहती है। नतीजतन, रोकथाम, जांच, उपचार और पोषण सेवाओं को जरूरतमंद आबादी तक समय पर पहुंचाना कठिन हो जाता है। संस्था ने संघर्षरत पक्षों से सुरक्षित व निर्बाध पहुंच सुनिश्चित करने और संघर्ष विराम की दिशा में कदम बढ़ाने की अपील भी दोहराई।
WHO का संदेश स्पष्ट है: बीमारी, भूख और सेवाओं की टूटती पहुंच के बीच सूडान की स्वास्थ्य प्रणाली ‘टूटने के कगार’ पर है—और मानवीय सहायता के लिए सुरक्षित पहुंच निर्णायक जरूरत बन गई है।
वैश्विक संदर्भ में यह संकट इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि लंबे संघर्षों में स्वास्थ्य ढांचा सबसे पहले कमजोर होता है और उसके बाद प्रकोप, कुपोषण तथा टीकाकरण में गिरावट के जरिए संकट कई वर्षों तक चलता रहता है। WHO की रिपोर्ट के मुताबिक सूडान में यही चक्र तेज़ी से दोहराया जा रहा है, इसलिए 2026 में स्वास्थ्य सहायता, वैक्सीन अभियानों और आपूर्ति-श्रृंखला को मजबूत करना प्राथमिकता माना जा रहा है।