यूक्रेन: जेलेंस्की बोले—अबू धाबी में अमेरिका-रूस-यूक्रेन की त्रिपक्षीय वार्ता ‘रचनात्मक’, अगले दौर की तैयारी
यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा कि अबू धाबी में यूक्रेन, रूस और अमेरिका के प्रतिनिधिमंडलों के बीच हुई त्रिपक्षीय बैठकें ‘रचनात्मक’ रहीं। बातचीत का फोकस युद्ध खत्म करने के संभावित मानदंडों पर रहा और आगे और बैठकों की संभावना जताई गई।
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने अबू धाबी में आयोजित त्रिपक्षीय बातचीत को ‘रचनात्मक’ बताया है। खबर के मुताबिक शनिवार, 24 जनवरी 2026 को उन्होंने कहा कि यूक्रेन, रूस और अमेरिका के प्रतिनिधिमंडलों के बीच हुई इन बैठकों में युद्ध समाप्त करने के लिए संभावित मानदंडों (क्राइटेरिया) पर केंद्रित चर्चा हुई।

जेलेंस्की के अनुसार यह प्रारूप लंबे समय बाद फिर से सामने आया है, जिसमें दो दिनों तक लगातार तीनों पक्षों के बीच बैठकें हुईं। उन्होंने सार्वजनिक संदेश के जरिए कहा कि यूक्रेनी प्रतिनिधिमंडल ने उन्हें वार्ता का विस्तृत ब्योरा दिया है और अब संयुक्त अरब अमीरात में वार्ताओं का यह चरण समाप्त हो चुका है।
रिपोर्ट में बताया गया कि जेलेंस्की ने इस बात को महत्वपूर्ण माना कि बातचीत ‘कंस्ट्रक्टिव’ रही। उनके मुताबिक चर्चा के केंद्र में यह रहा कि युद्ध समाप्त करने के लिए किन-किन मानकों पर सहमति बनाई जा सकती है।
यूक्रेनी राष्ट्रपति ने यह भी संकेत दिया कि आगे और बैठकें होने की संभावना है और वे ‘संभवतः अगले सप्ताह’ हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि वे इस बात को मूल्यवान मानते हैं कि युद्ध समाप्ति की प्रक्रिया में अमेरिका की भूमिका ‘पर्यवेक्षण और नियंत्रण’ (मॉनिटरिंग/कंट्रोल) की हो और वास्तविक सुरक्षा की गारंटी दी जाए।
जेलेंस्की के बयान का संदर्भ उस व्यापक कूटनीतिक प्रयास से जुड़ता है जिसमें युद्ध के संभावित अंत, किसी भी समझौते की रूपरेखा और सुरक्षा व्यवस्था जैसे मुद्दे प्रमुख होते हैं। खबर के मुताबिक, अबू धाबी की बैठकें इसी दिशा में शुरुआती पड़ाव के रूप में देखी जा रही हैं।
हालांकि रिपोर्ट में किसी अंतिम समझौते की घोषणा का उल्लेख नहीं है, लेकिन जेलेंस्की की टिप्पणियों से यह संकेत मिलता है कि बातचीत में कुछ साझा आधार तलाशने की कोशिश हुई। साथ ही, आगे की बैठकों की बात यह बताती है कि विभिन्न पक्षों के बीच संवाद का चैनल सक्रिय रखा जा रहा है।
युद्ध समाप्त करने के ‘क्राइटेरिया’ पर चर्चा का अर्थ यह भी हो सकता है कि भविष्य में संघर्ष-विराम, सीमाओं/क्षेत्रों, कैदियों की अदला-बदली, सुरक्षा गारंटी या अंतरराष्ट्रीय निगरानी जैसे मुद्दों पर बातचीत का दायरा बढ़े। हालांकि इस चरण में किन बिंदुओं पर कितनी सहमति बनी, इसका विस्तृत विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया।
अब नजर इस पर रहेगी कि अगले दौर की वार्ता कब और किस एजेंडे के साथ होती है, और क्या त्रिपक्षीय बातचीत किसी ठोस रूपरेखा तक पहुंच पाती है।