स्पेन ने करीब 5 लाख बिना दस्तावेज़ वाले प्रवासियों को वैध दर्जा देने का फ़ैसला किया
स्पेन की सरकार ने एक शाही डिक्री के ज़रिए बड़े पैमाने पर नियमितीकरण (रेग्युलराइज़ेशन) योजना को मंज़ूरी दी है, जिसके तहत देश में पहले से रह रहे करीब 5 लाख (कुछ अनुमानों में 8 लाख तक) बिना दस्तावेज़ वाले लोगों को कानूनी निवास और काम करने की अनुमति मिल सकती है। आवेदन अप्रैल 2026 से स्वीकार होने की उम्मीद है।
क्या हुआ और कब लागू होगा
27 जनवरी 2026 को स्पेन की समाजवादी नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार ने एक शाही डिक्री को मंज़ूरी दी, जिसके तहत बड़ी संख्या में अनियमित स्थिति में रह रहे प्रवासियों को कानूनी दर्जा और वर्क ऑथराइज़ेशन मिल सकेगा। सरकार के अनुसार यह कदम संसद में अटके हुए समान विधेयक के बजाय त्वरित डिक्री के माध्यम से लिया गया है, ताकि प्रक्रिया जल्दी शुरू हो सके। रिपोर्टों के मुताबिक़ आवेदन अप्रैल 2026 से लेकर जून 2026 के अंत तक लिए जा सकते हैं।

कौन पात्र हो सकता है
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार पात्रता के लिए मुख्य शर्तें ये हैं: व्यक्ति 31 दिसंबर 2025 से पहले स्पेन में मौजूद रहा हो, कम से कम लगभग पाँच महीने से देश में रह रहा हो, और उसका कोई आपराधिक रिकॉर्ड न हो। यह योजना उन शरण-आवेदकों तक भी विस्तारित बताई जा रही है जिन्होंने 31 दिसंबर 2025 से पहले अंतरराष्ट्रीय संरक्षण (असाइलम) के लिए आवेदन किया था। सरकार का तर्क है कि यह कदम पहले से स्पेन में रह रहे लोगों की स्थिति को ‘मान्यता’ देने और उन्हें औपचारिक अर्थव्यवस्था से जोड़ने के लिए है।
सरकार की दलील: अर्थव्यवस्था और एकीकरण
स्पेन के अधिकारियों ने इस पहल को मानवाधिकार, एकीकरण और सामाजिक सह-अस्तित्व पर आधारित बताया है। साथ ही, सरकार यह भी कहती है कि श्रम-आवश्यकताओं, सेवा क्षेत्रों और जनसांख्यिकीय दबावों (बढ़ती उम्र वाली आबादी) के कारण प्रवासन स्पेन की अर्थव्यवस्था के लिए व्यावहारिक ज़रूरत बन चुका है। समर्थकों का कहना है कि कानूनी स्थिति मिलने से कर-आधार बढ़ सकता है, कामकाज अधिक औपचारिक होगा और श्रमिक शोषण घटेगा।
राजनीतिक संदर्भ और विरोध
रिपोर्टों के मुताबिक़ यह डिक्री वामपंथी दल पोदेमोस के दबाव और राजनीतिक समझौते के बाद तेज़ी से आगे बढ़ी। वहीं, रूढ़िवादी और धुर-दक्षिणपंथी दलों ने इसे ‘गलत संकेत’ देने वाला कदम बताते हुए आलोचना की है। यूरोप के कई हिस्सों में सख़्त प्रवासन रुख के बीच स्पेन का यह निर्णय अपेक्षाकृत उदार नीति के रूप में देखा जा रहा है।