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गणतंत्र दिवस 2026: ‘76 साल बाद’ बना दुर्लभ पंचांग-संयोग, माघ शुक्ल अष्टमी फिर उसी तिथि पर

ज्योतिषीय पंचांग के मुताबिक 26 जनवरी 2026 को वही तिथि-संयोग दोहराया गया है जो 26 जनवरी 1950 के दिन था। इस बार भी विक्रम संवत 2082 में माघ शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि पड़ रही है, जिसे कई लोग ‘दुर्लभ संयोग’ मानते हैं।

दैनिक समाचार न्यूज़ डेस्क

क्या है ‘दुर्लभ संयोग’

26 जनवरी 2026 (सोमवार) को देश 77वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। पंचांग-आधारित जानकारी के अनुसार, 26 जनवरी 1950 को जब भारत गणतंत्र बना था, उस दिन विक्रम संवत 2006 में माघ माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि थी। अब 76 साल बाद, 26 जनवरी 2026 को विक्रम संवत 2082 में भी माघ शुक्ल अष्टमी तिथि ही पड़ रही है। इसी पुनरावृत्ति को ‘दुर्लभ संयोग’ बताया गया है।

गणतंत्र दिवस 2026: ‘76 साल बाद’ बना दुर्लभ पंचांग-संयोग, माघ शुक्ल अष्टमी फिर उसी तिथि पर
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पंचांग में तिथि-नक्षत्र और समय-सीमा

रिपोर्ट के अनुसार, 26 जनवरी 2026 को अष्टमी तिथि रात 9:17 बजे तक बताई गई है। नक्षत्र के तौर पर अश्विनी दोपहर 12:32 बजे तक रहने और उसके बाद भरणी शुरू होने का उल्लेख है। चंद्रमा के मेष राशि में गोचर की बात भी कही गई है।

इसी पृष्ठभूमि में कई लोग इसे परंपरा, प्रतीक और पंचांग के हिसाब से खास दिन मानते हैं। हालांकि ऐसे संयोगों को लेकर आस्था और व्याख्या व्यक्ति-व्यक्ति पर निर्भर होती है।

क्यों चर्चा में है यह बात

गणतंत्र दिवस देश के संविधान लागू होने की याद का दिन है, और हर साल यह अलग-अलग ऐतिहासिक-सांस्कृतिक संदर्भों के साथ मनाया जाता है। इस बार पंचांग की तिथि का ‘1950 जैसी’ बताई जा रही पुनरावृत्ति, कई पाठकों के लिए जिज्ञासा का विषय बन रही है—खासतौर पर इसलिए, क्योंकि यह 76 वर्षों बाद बताया गया समान तिथि-संयोग है।

आस्था से जुड़ी खबरें अक्सर संक्षिप्त रहती हैं, इसलिए यहां संदर्भ को स्पष्ट करने के लिए पृष्ठभूमि को विस्तार से समझाया गया है—ताकि तिथि-संयोग और उससे जुड़ी ‘खास’ होने की वजह पाठकों को साफ दिखे।

स्रोत पुस्तिका

  1. NDTV (Hindi)NDTV (Hindi)