भारत में लौटा ‘रिवर्स माइग्रेशन’ ट्रेंड: अमेरिका छोड़ भारत लौट रहे टेक वर्कर्स, LinkedIn डेटा में 40% उछाल
LinkedIn डेटा के हवाले से एक रिपोर्ट में कहा गया है कि 2025 की तीसरी तिमाही में अमेरिका में काम कर रहे भारतीय टेक प्रोफेशनल्स में से भारत लौटकर जॉब लोकेशन बदलने वालों की संख्या 40% बढ़ी। वजहों में H-1B वीज़ा नियमों की अनिश्चितता, बढ़ती लागत और भारत में अवसरों का विस्तार शामिल बताया गया है।
अमेरिका में टेक सेक्टर को लंबे समय तक भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए ‘ड्रीम डेस्टिनेशन’ माना जाता रहा है, लेकिन अब तस्वीर बदलती दिख रही है। जॉब पोस्टिंग प्लेटफॉर्म LinkedIn के डेटा के आधार पर प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक 2025 की तीसरी तिमाही में ऐसे भारतीय टेक वर्कर्स की संख्या में 40% की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिन्होंने अपनी जॉब लोकेशन अमेरिका से बदलकर भारत कर दी। यह संकेत देता है कि पारंपरिक ‘ब्रेन ड्रेन’ की जगह कुछ मामलों में ‘रिवर्स माइग्रेशन’ यानी देश वापसी की प्रवृत्ति तेज हो रही है।

H-1B वीज़ा की अनिश्चितता क्यों बन रही है बड़ा कारण?
रिपोर्ट में सबसे बड़ा कारण H-1B वीज़ा को बताया गया है, जो अमेरिका में स्किल्ड टेक जॉब्स के लिए प्रमुख वर्क वीज़ा माना जाता है। रिपोर्ट के अनुसार ट्रंप प्रशासन के दौरान इस वीज़ा को लेकर अनिश्चितता बढ़ी, जिससे टेक इंडस्ट्री में काम करने वाले विदेशी कर्मचारियों—खासकर भारतीयों—के लिए स्थायी करियर प्लानिंग मुश्किल होती गई। जिनके पास पहले से जॉब है, उन्हें भी नियमों और प्रक्रिया में बदलाव की आशंका के कारण असुरक्षा महसूस हो सकती है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वीज़ा से जुड़ी शर्तों में बदलाव ने नए ग्रेजुएट्स और शुरुआती करियर वाले प्रोफेशनल्स के लिए अमेरिका में टिके रहना और भी चुनौतीपूर्ण बना दिया है। कई कंपनियों के लिए वीज़ा स्पॉन्सरशिप की प्रक्रिया जटिल और महंगी होने की बात भी सामने आती है, जिसका असर हायरिंग पर पड़ता है।
भारत में बढ़ते अवसर और ‘घर लौटने’ की व्यावहारिक वजहें
रिपोर्ट में भारत लौटने के पीछे अन्य व्यावहारिक वजहों का भी उल्लेख है। इनमें भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम का विस्तार, मल्टीनेशनल कंपनियों के भारत में बड़े टेक हब, और करियर ग्रोथ के नए विकल्प शामिल बताए गए हैं। इसके साथ ही परिवार और सामाजिक नेटवर्क के करीब रहने की इच्छा भी एक बड़ा फैक्टर माना गया है।
कुछ प्रोफेशनल्स के बयान के आधार पर रिपोर्ट में यह निष्कर्ष भी निकाला गया है कि अमेरिका में स्थायित्व का दबाव—इमिग्रेशन स्टेटस, लंबा वेटिंग पीरियड, और बदलती नीतियां—ऐसे निर्णयों को प्रभावित कर रहे हैं। वहीं भारत में काम और निजी जीवन के संतुलन (वर्क-लाइफ बैलेंस) को लेकर अपेक्षाकृत बेहतर विकल्प मिलने की उम्मीद भी वापसी को बढ़ावा दे सकती है।
आगे क्या संकेत मिलते हैं?
यदि यह ट्रेंड आगे भी जारी रहता है, तो भारत के लिए यह उच्च-कौशल वाले टैलेंट की वापसी का अवसर बन सकता है—खासकर उन क्षेत्रों में जहां ग्लोबल अनुभव और नेटवर्क से देश के स्टार्टअप्स, प्रोडक्ट कंपनियों और रिसर्च टीमों को फायदा मिल सकता है। हालांकि, यह भी महत्वपूर्ण है कि यह डेटा एक अवधि (2025 की तीसरी तिमाही) पर आधारित है, इसलिए लंबी अवधि की दिशा समझने के लिए आगे के आंकड़े और इंडस्ट्री ट्रेंड देखे जाएंगे।