आईएमएफ प्रमुख का दावोस में संदेश: एआई से नौकरियों पर ‘तेज़ लहर’ जैसा असर, युवा सबसे अधिक प्रभावित हो सकते हैं
डीडब्ल्यू रिपोर्ट के मुताबिक़ दावोस में आईएमएफ की प्रमुख क्रिस्टालिना जॉर्जिएवा ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) श्रम बाजार में बड़ी उथल-पुथल ला सकता है। रिपोर्ट में आईएमएफ रिसर्च का हवाला देते हुए बताया गया है कि उन्नत अर्थव्यवस्थाओं में बड़ी संख्या में नौकरियां एआई से प्रभावित हो सकती हैं।
दावोस से चेतावनी: एआई का श्रम बाजार पर बड़ा दबाव
डीडब्ल्यू की रिपोर्ट के अनुसार विश्व आर्थिक मंच (दावोस) में आईएमएफ की प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जॉर्जिएवा ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) श्रम बाजार पर ऐसी ‘मजबूत लहर’ की तरह असर डाल सकता है जो कई भूमिकाओं को बदल दे। रिपोर्ट के मुताबिक़ उन्होंने बताया कि यह बदलाव कौशल मांग (स्किल डिमांड) को तेज़ी से पुनर्गठित करेगा और इसके प्रभाव को समझने के लिए सरकारों, कंपनियों और शिक्षण संस्थानों को तैयारी करनी होगी।

कौन-सी नौकरियां और किस तरह प्रभावित हो सकती हैं
रिपोर्ट में आईएमएफ रिसर्च के हवाले से कहा गया है कि उन्नत अर्थव्यवस्थाओं में बड़ी हिस्सेदारी वाली नौकरियां एआई से प्रभावित हो सकती हैं—कहीं यह उत्पादकता बढ़ाएगा, कहीं भूमिकाएं बदल देगा और कुछ मामलों में कुछ काम स्वचालित हो सकते हैं। इसका मतलब यह नहीं कि सारी नौकरियां खत्म होंगी; लेकिन काम के तरीके, अपेक्षित कौशल और करियर-प्रगति की दिशा बदलने की संभावना है।
युवा और स्किल गैप
डीडब्ल्यू के अनुसार जॉर्जिएवा ने यह भी रेखांकित किया कि युवा श्रमिक विशेष रूप से जोखिम में हो सकते हैं, क्योंकि शुरुआती स्तर की कई भूमिकाएं—जहां लोग अनुभव बनाते हैं—सबसे पहले ऑटोमेशन/एआई टूल्स के दायरे में आ सकती हैं। ऐसे में शिक्षा, अप्रेंटिसशिप, और ऑन-द-जॉब ट्रेनिंग मॉडल को तेजी से अपडेट करना जरूरी होगा ताकि युवा नए कौशल के साथ नौकरी बाजार में उतर सकें।
क्या समाधान सुझाए जाते हैं
नीति के स्तर पर आम तौर पर तीन दिशाओं पर जोर दिया जाता है: (1) रिस्क में मौजूद कामगारों के लिए री-स्किलिंग/अप-स्किलिंग, (2) एआई अपनाने के लिए जिम्मेदार नियम व श्रमिक सुरक्षा, और (3) कंपनियों में उत्पादकता लाभ का व्यापक वितरण। रिपोर्ट इसी व्यापक बहस की ओर इशारा करती है कि एआई को ‘मौका’ बनाने के लिए तैयारी कितनी निर्णायक है।