एआई की होड़ में अमेरिका से जीत पाएगा चीन? मॉडल्स की संख्या बढ़ी, टिकाऊ बिजनेस पर सवाल
रिपोर्ट के मुताबिक चीन में एआई मॉडल्स और स्टार्टअप्स की रफ्तार तेज रही है, लेकिन लाभ कमाने और ‘अव्यवस्थित प्रतिस्पर्धा’ से बचने की चुनौती भी बड़ी है। अमेरिका-चीन तकनीकी प्रतिस्पर्धा के बीच ओपन-सोर्स और गुणवत्ता को लेकर बहस जारी है।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के क्षेत्र में चीन और अमेरिका के बीच प्रतिस्पर्धा तेज बनी हुई है। एक विश्लेषण के मुताबिक, चीन में बड़ी संख्या में ‘लार्ज लैंग्वेज मॉडल’ जारी किए गए हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि वहां एआई इंडस्ट्री तेजी से विस्तार कर रही है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि चीनी सरकारी मीडिया के अनुसार जुलाई 2025 तक चीनी कंपनियों ने 1,500 से अधिक लार्ज लैंग्वेज मॉडल जारी कर दिए थे। यह संख्या वैश्विक स्तर पर जारी मॉडलों के बड़े हिस्से के बराबर बताई गई, जिससे चीन की आक्रामक रणनीति झलकती है।
लेकिन सवाल यह भी है कि इतनी बड़ी संख्या में सामने आए मॉडल्स और स्टार्टअप्स में से कितने वास्तव में टिकाऊ बिजनेस बन पाएंगे। रिपोर्ट के अनुसार, बीजिंग ने तकनीकी क्षेत्र को ‘अव्यवस्थित प्रतिस्पर्धा’ से बचने की सलाह दी है—यानी केवल तेजी से मॉडल लॉन्च करना पर्याप्त नहीं, बाजार में स्थिरता और गुणवत्ता भी जरूरी है।
मॉडल प्रदर्शन को लेकर भी तुलना की जाती है। रिपोर्ट में एक बेंचमार्क रिपोर्ट का उल्लेख है, जिसके अनुसार तर्क, ज्ञान, गणित और कोडिंग क्षमता जैसे क्षेत्रों में शीर्ष एआई मॉडलों की सूची में चीन के मॉडल्स की मौजूदगी मजबूत दिखती है, हालांकि शीर्ष स्थानों पर अमेरिकी कंपनियों का दबदबा बना रह सकता है।
एक दिलचस्प पहलू यह है कि चीन के कई प्रमुख एआई मॉडल ओपन-सोर्स हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, ओपन-सोर्स रणनीति से इकोसिस्टम तेजी से बढ़ सकता है, डेवलपर्स की भागीदारी बढ़ती है और स्टार्टअप्स को नए प्रयोग करने में मदद मिलती है।
कुल मिलाकर, रिपोर्ट यह निष्कर्ष निकालती है कि एआई की दौड़ सिर्फ तकनीक की नहीं, बल्कि पूंजी, प्रतिभा, नियमन और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला की भी है। इसलिए चीन की बढ़त के संकेतों के बावजूद, यह देखना अहम होगा कि कौन-सा देश नवाचार के साथ-साथ भरोसेमंद, सुरक्षित और लाभकारी एआई उत्पादों को लंबे समय तक बनाए रख पाता है।