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भारत की पहली स्वदेशी सेमीकंडक्टर चिप ‘विक्रम’: इसरो की लैब से लेकर ‘डिजिटल युग के हीरे’ तक

DW की रिपोर्ट के अनुसार भारत ने पहली स्वदेशी सेमीकंडक्टर चिप तैयार की, जिसे ‘विक्रम’ नाम दिया गया। मंत्री अश्विनी वैष्णव ने यह चिप प्रधानमंत्री को सौंपने की जानकारी दी और सेमीकॉन कार्यक्रम/मिशन के तहत चल रही परियोजनाओं का उल्लेख किया।

दैनिक समाचार न्यूज़ डेस्क

भारत के सेमीकंडक्टर मिशन को लेकर बड़ी उपलब्धि के रूप में ‘विक्रम’ नाम की स्वदेशी चिप चर्चा में रही। डीडब्ल्यू की रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 2 सितंबर 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को यह चिप सौंपे जाने की जानकारी दी। रिपोर्ट में बताया गया कि इसे इसरो की सेमीकंडक्टर लैब ने तैयार किया है।

भारत की पहली स्वदेशी सेमीकंडक्टर चिप ‘विक्रम’: इसरो की लैब से लेकर ‘डिजिटल युग के हीरे’ तक
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रिपोर्ट की पृष्ठभूमि यह दिखाती है कि सेमीकंडक्टर चिप्स अब केवल तकनीकी उत्पाद नहीं, बल्कि रणनीतिक क्षमता और आर्थिक सुरक्षा का आधार बन चुके हैं। स्मार्टफोन और डेटा सेंटर से लेकर हेल्थकेयर उपकरण, परिवहन, संचार, रक्षा और अंतरिक्ष प्रणालियों तक—लगभग हर आधुनिक प्रणाली में चिप्स की भूमिका निर्णायक है। इसी कारण वैश्विक स्तर पर चिप आपूर्ति को लेकर देशों के बीच प्रतिस्पर्धा तेज हुई है।

डीडब्ल्यू की रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि सरकार ने 2021 में सेमीकॉन भारत कार्यक्रम शुरू किया था और इसके बाद अलग-अलग वर्षों में सेमीकंडक्टर प्लांट्स/परियोजनाओं को मंजूरी मिलती गई। इस श्रृंखला का लक्ष्य यह है कि भारत में डिजाइन से लेकर निर्माण और सप्लाई-चेन तक का घरेलू इकोसिस्टम मजबूत हो, ताकि विदेशों पर निर्भरता घटे और उद्योगों को स्थिर आपूर्ति मिल सके।

प्रधानमंत्री मोदी के वक्तव्य का संदर्भ देते हुए रिपोर्ट में बताया गया कि सेमीकंडक्टर चिपों को उन्होंने ‘डिजिटल युग का हीरा’ कहा। संदेश स्पष्ट है—जैसे ऊर्जा सुरक्षा के लिए कभी तेल को रणनीतिक संसाधन माना गया, वैसे ही डिजिटल अर्थव्यवस्था में चिप्स की उपलब्धता प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त तय करती है।

आगे की चुनौती यह रहेगी कि ‘विक्रम’ जैसी उपलब्धियों को बड़े पैमाने के उत्पादन, विश्वसनीय गुणवत्ता, लागत-प्रतिस्पर्धा और वैश्विक सप्लाई-चेन मानकों के अनुरूप कैसे बदला जाए। यदि यह संक्रमण सफल रहा, तो इससे भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटो, टेलीकॉम और उभरते एआई/डेटा-इन्फ्रा क्षेत्रों को दीर्घकाल में मजबूती मिल सकती है।

स्रोत पुस्तिका

  1. DW (Deutsche Welle)DW (Deutsche Welle)