Meta पर नया मुकदमा: आरोप—WhatsApp ने एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन/प्राइवेसी को लेकर यूज़र्स को गुमराह किया
एक रिपोर्ट के मुताबिक Meta के खिलाफ अमेरिका में दायर नए मुकदमे में दावा किया गया कि WhatsApp के संदेशों की प्राइवेसी को लेकर यूज़र्स को गुमराह किया गया। Meta ने आरोपों से इनकार किया है।
WhatsApp की प्राइवेसी को लेकर एक बार फिर बड़ा विवाद सामने आया है। 25 जनवरी 2026 को प्रकाशित एक हिंदी रिपोर्ट के मुताबिक Meta के खिलाफ अमेरिका में दायर एक नए मुकदमे में आरोप लगाया गया है कि कंपनी ने अरबों WhatsApp यूज़र्स को उनके मैसेज की गोपनीयता के बारे में गुमराह किया और यह दावा गलत तरीके से पेश किया कि चैट पूरी तरह ‘एंड-टू-एंड’ एन्क्रिप्टेड हैं। रिपोर्ट में ‘whistleblower’ के अकाउंट का हवाला दिए जाने का भी जिक्र है।

रिपोर्ट के अनुसार मुकदमा सैन फ्रांसिस्को में एक अमेरिकी डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में दायर किया गया, जिसमें Meta के पुराने दावों को चुनौती दी गई कि WhatsApp संदेश इतने सुरक्षित हैं कि कंपनी खुद भी उन्हें एक्सेस नहीं कर सकती। Meta ने इन आरोपों को खारिज करते हुए मुकदमे को बेबुनियाद बताया है।
इस घटनाक्रम का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि WhatsApp भारत सहित कई देशों में निजी और व्यावसायिक संवाद का प्रमुख माध्यम है। ऐसे में प्राइवेसी से जुड़े किसी भी कानूनी विवाद का असर उपयोगकर्ताओं के भरोसे, रेगुलेटरी बहस और प्लेटफॉर्म की पारदर्शिता की मांग पर पड़ सकता है।
यूज़र्स के स्तर पर सबसे जरूरी बात यह है कि ऐप्स के ‘एन्क्रिप्शन’ दावों और वास्तविक डेटा-प्रथाओं में अंतर समझना आसान नहीं होता। विशेषज्ञ अक्सर सलाह देते हैं कि संवेदनशील जानकारी भेजते समय अतिरिक्त सतर्कता रखें, सुरक्षा अपडेट समय पर करें, लिंक/फाइल शेयरिंग में सावधानी बरतें और ऐप की प्राइवेसी सेटिंग्स को नियमित रूप से रिव्यू करें। अदालतों में चल रही प्रक्रिया के नतीजे आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि आरोप किस हद तक टिकते हैं और Meta/WhatsApp को किस तरह की जवाबदेही निभानी होगी।