RTI से खुलासा: दिल्ली समेत 11 AIIMS में फैकल्टी पदों की भारी कमी, 4,099 में से 1,600 पद खाली बताए गए
एक रिपोर्ट के मुताबिक आरटीआई जवाब में बताया गया कि देश के 11 एम्स में फैकल्टी पदों की बड़ी संख्या खाली है। खबर में यह भी कहा गया कि दिल्ली एम्स में स्वीकृत 1,306 फैकल्टी पदों में से 524 पद रिक्त हैं, जिससे प्रमुख विभागों में स्टाफ की कमी को स्वास्थ्य सेवाओं की मांग के सामने बड़ी चुनौती माना जा रहा है।
देश के बड़े सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों में स्टाफिंग संकट का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। एक रिपोर्ट के अनुसार आरटीआई से मिली जानकारी में बताया गया कि दिल्ली समेत देश के 11 अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थानों (AIIMS) में फैकल्टी के कुल 4,099 स्वीकृत पदों में से 1,600 पद रिक्त हैं। इस आंकड़े को लगभग 39% पद खाली होने के रूप में प्रस्तुत किया गया।

खबर में विशेष तौर पर AIIMS दिल्ली का उदाहरण दिया गया, जहां 1,306 स्वीकृत फैकल्टी पदों में से 524 पद खाली बताए गए। इसका सीधा असर ओपीडी सेवाओं, सुपर-स्पेशियलिटी विभागों की उपलब्धता, रेजिडेंट ट्रेनिंग और शोध कार्यों की गति पर पड़ सकता है—क्योंकि फैकल्टी डॉक्टर न केवल इलाज करते हैं, बल्कि मेडिकल शिक्षा और गाइडेंस का भी प्रमुख आधार होते हैं।
जब मरीजों की संख्या बढ़ती है और विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता सीमित रहती है, तो प्रतीक्षा समय, रेफरल दबाव और इमरजेंसी लोड जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। कई विभागों में सेवा-गुणवत्ता बनाए रखने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ती है, जिसमें अतिरिक्त ड्यूटी, आउटसोर्सिंग या अस्थायी नियुक्तियों का सहारा लिया जाता है।
रिपोर्ट की पृष्ठभूमि में यह बहस भी तेज होती है कि भर्ती प्रक्रिया को कितना तेज किया जाए, नए AIIMS में स्थायी फैकल्टी को कैसे आकर्षित किया जाए, और क्या वेतन/करियर प्रोग्रेशन/शैक्षणिक स्वतंत्रता जैसे कारकों पर नीति सुधार आवश्यक हैं। आने वाले समय में स्वास्थ्य ढांचे के विस्तार के साथ-साथ मानव संसाधन की भरपाई पर भी उतना ही फोकस जरूरी होगा।