WHO रिपोर्ट के बीच भारत का 2026 लक्ष्य: बढ़ते खसरा मामलों की चिंता, टीकाकरण कवरेज मजबूत करने पर जोर
WHO से जुड़े आंकड़ों/रिपोर्ट पर आधारित एक रिपोर्ट में बताया गया कि भारत खसरा मामलों से प्रभावित शीर्ष देशों में शामिल रहा। इसके साथ ही 2026 तक खसरा-रूबेला उन्मूलन लक्ष्य पाने के लिए टीकाकरण कवरेज और निगरानी बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
खसरा (Measles) को लेकर वैश्विक चिंता के बीच भारत में भी सतर्कता बढ़ने की जरूरत बताई जा रही है। 4 दिसंबर 2025 को प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, WHO को रिपोर्ट किए गए प्रोविजनल डेटा (अप्रैल से अक्टूबर 2025) में भारत उन शीर्ष देशों में शामिल रहा जहां खसरा के मामले दर्ज हुए। इस संदर्भ में यह सवाल फिर उभर रहा है कि 2026 तक खसरा-रूबेला उन्मूलन का लक्ष्य हासिल करने के लिए आखिरी मील तक टीकाकरण और निगरानी कैसे मजबूत की जाए।

रिपोर्ट में WHO के महानिदेशक का यह संदेश भी रेखांकित हुआ कि खसरा अत्यंत संक्रामक है और सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली की किसी भी कमजोरी का फायदा उठा सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक संक्रमण को रोकने का सबसे प्रभावी तरीका उच्च स्तर का वैक्सीन कवरेज बनाए रखना है, ताकि समुदाय-स्तर पर सुरक्षा बनी रहे और संक्रमण की कड़ी टूटे।
भारत ने 2025–26 के दौरान खसरा-रूबेला उन्मूलन अभियान और दो-डोज शेड्यूल के जरिये कवरेज बढ़ाने पर जोर दिया है। फिर भी चुनौती यह है कि शहरी झुग्गी-झोपड़ी क्षेत्रों, प्रवासी आबादी, दूर-दराज के इलाकों और आउटब्रेक-प्रोन जिलों तक समय पर टीके पहुंचे। खसरा का वायरस इतनी तेजी से फैलता है कि यदि किसी समुदाय में टीकाकरण में गैप रह जाए तो संक्रमण बड़े पैमाने पर फैल सकता है।
स्वास्थ्य के नजरिये से इसका व्यावहारिक संदेश यह है कि माता-पिता/देखभाल करने वालों को बच्चों का नियमित टीकाकरण शेड्यूल समय पर पूरा कराना चाहिए और किसी इलाके में प्रकोप की खबर आए तो स्थानीय स्वास्थ्य विभाग की सलाह के मुताबिक तुरंत जांच/परामर्श लेना चाहिए। स्कूलों और समुदायों में जागरूकता, सक्रिय निगरानी और त्वरित प्रतिक्रिया (rapid response) ही 2026 लक्ष्य की दिशा में निर्णायक भूमिका निभा सकती है।