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NDTV हेल्थ: 2026 में AI और mRNA से इलाज में बड़ा बदलाव; कैंसर से लेकर मोटापे तक नई उम्मीदें

NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक 2026 को मेडिकल साइंस के लिए ‘टर्निंग पॉइंट’ माना जा रहा है। AI आधारित डायग्नोसिस, mRNA तकनीक, लिक्विड बायोप्सी और किफायती दवाओं की दिशा में तेज प्रगति की उम्मीद जताई गई है।

दैनिक समाचार न्यूज़ डेस्क

NDTV की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि साल 2026 मेडिकल साइंस के लिए एक महत्वपूर्ण ‘टर्निंग पॉइंट’ साबित हो सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक महामारी के बाद कैंसर, मोटापा और पुरानी बीमारियों के बढ़ते बोझ ने हेल्थ सिस्टम पर दबाव बढ़ाया है, जिसके चलते कई देशों ने मेडिकल रिसर्च को प्राथमिकता बनाई है। इसी पृष्ठभूमि में 2026 में नई तकनीकों और उपचार पद्धतियों के विस्तार की संभावना जताई गई है।

NDTV हेल्थ: 2026 में AI और mRNA से इलाज में बड़ा बदलाव; कैंसर से लेकर मोटापे तक नई उम्मीदें
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रिपोर्ट में कहा गया है कि कैंसर उपचार के क्षेत्र में सबसे तेज प्रगति की उम्मीद है। पिछले वर्षों में CAR-T सेल थेरेपी और टार्गेटेड ड्रग्स जैसे विकल्पों को मंजूरी मिलने का उल्लेख करते हुए बताया गया कि 2026 में इनका दायरा बढ़ सकता है। इसके अलावा KRAS जैसे जीन-टार्गेटेड उपचारों को लेकर भी उम्मीदें जताई गई हैं, जिन्हें पहले बहुत कठिन माना जाता था।

AI, डिजिटल मेडिसिन और ‘लिक्विड बायोप्सी’ पर जोर

रिपोर्ट के अनुसार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित डायग्नोसिस टूल्स और डिजिटल मेडिसिन का इस्तेमाल कई देशों में बढ़ रहा है। AI की मदद से यह तय करने में सहायता मिलने का दावा किया गया है कि किस मरीज पर कौन-सी दवा ज्यादा असरदार हो सकती है। साथ ही ‘लिक्विड बायोप्सी’ को 2026 की अहम तकनीक के तौर पर रखा गया है, जिसमें केवल खून की जांच से कैंसर की पहचान और निगरानी संभव होने की बात कही गई है।

NDTV की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत किफायती दवाओं और बायोसिमिलर के जरिए इलाज को ज्यादा सुलभ बनाने की दिशा में बड़ी भूमिका निभा सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक इससे कई विकासशील देशों में महंगे इलाज का विकल्प अपेक्षाकृत सस्ता हो सकता है।

रिपोर्ट में मोटापे की दवाओं को लेकर भी 2026 को महत्वपूर्ण बताया गया है और संकेत दिया गया है कि कुछ बड़े पेटेंट्स के खत्म होने से जेनेरिक विकल्पों के रास्ते खुल सकते हैं। कुल मिलाकर रिपोर्ट का निष्कर्ष यह है कि कैंसर, जीन-आधारित थेरेपी, mRNA तकनीक, AI सपोर्टेड मेडिसिन और किफायती दवाएं—इन सभी के मेल से 2026 वह साल हो सकता है जब रिसर्च का फायदा ज्यादा लोगों तक पहुंचने लगे।

स्रोत पुस्तिका

  1. NDTV IndiaNDTV India