H-1B नियम सख्त होने के बाद भारत में भर्ती बढ़ी: बड़ी टेक कंपनियों ने 2025 में जोड़े 32,000+ कर्मचारी
H-1B वीज़ा नियमों में सख्ती के बीच मेटा, अमेजन, ऐपल, माइक्रोसॉफ्ट, नेटफ्लिक्स और गूगल जैसी कंपनियों ने भारत में बड़े स्तर पर हायरिंग की। रिपोर्ट के मुताबिक 2025 के अंत तक कुल 32,000 से अधिक कर्मचारी जोड़े गए।
भर्ती क्यों बढ़ी?
रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका में H-1B वीज़ा नियमों में सख्ती के बीच बड़ी टेक कंपनियों ने भारत में हायरिंग को तेज किया। इसका एक बड़ा कारण यह है कि कंपनियां वैश्विक स्तर पर टैलेंट तक पहुंच बनाए रखना चाहती हैं, और भारत में स्किल्ड टेक वर्कफोर्स तथा लागत-प्रभावी ऑपरेशंस की वजह से यह रुझान मजबूत हुआ है।

किन कंपनियों का जिक्र है और कितना विस्तार?
इस रिपोर्ट में मेटा, अमेजन, ऐपल, माइक्रोसॉफ्ट, नेटफ्लिक्स और गूगल जैसी कंपनियों का उल्लेख है। बताया गया है कि 2025 के अंत तक इन कंपनियों ने भारत में कुल मिलाकर 32,000 से ज्यादा नए कर्मचारियों को जोड़ा। साथ ही स्टाफिंग फर्म एक्सफेनो के हवाले से कहा गया है कि इनकी भारत में कुल वर्कफोर्स लगभग 2.14 लाख के आसपास पहुंच गई।
कौन-कौन से रोल्स/स्किल्स की मांग बढ़ी?
भर्ती का दबाव खासतौर पर AI, डेटा, क्लाउड, साइबर सिक्योरिटी और स्पेशलाइज्ड इंजीनियरिंग स्किल्स पर देखा गया है। कंपनियां ऐसे रोल्स पर ध्यान दे रही हैं जो प्रोडक्ट डेवलपमेंट, मॉडल ट्रेनिंग/डिप्लॉयमेंट और प्लेटफॉर्म स्केलिंग में मदद कर सकें।
भारत के लिए क्या मायने?
- टेक रोजगार के अवसरों में वृद्धि और स्किल अपग्रेड की जरूरत
- बेंगलुरु, हैदराबाद, गुरुग्राम जैसे हब्स में प्रतिस्पर्धा बढ़ना
- AI/क्लाउड प्रतिभा के लिए वेतन और रिटेंशन दबाव
- स्थानीय स्टार्टअप्स के लिए टैलेंट मार्केट और चुनौतीपूर्ण होना
कुल मिलाकर, वीज़ा नीति में बदलाव का असर केवल अमेरिका तक सीमित नहीं रहकर भारत के जॉब मार्केट और टेक इकोसिस्टम में भी स्पष्ट दिखाई दे रहा है।