‘मदर ऑफ ऑल डील्स’: भारत-ईयू FTA में टैरिफ कटौती का रोडमैप, संवेदनशील सेक्टरों पर सुरक्षा कवच
भारत और यूरोपीय यूनियन ने फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को अंतिम रूप दिया। रिपोर्टों के मुताबिक समय के साथ बड़े हिस्से का व्यापार टैरिफ-फ्री हो सकता है, जबकि कुछ संवेदनशील क्षेत्रों को बाहर/संरक्षित रखा गया है।
भारत और यूरोपीय यूनियन (EU) के बीच 27 जनवरी 2026 को फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को अंतिम रूप दिए जाने के बाद व्यापार जगत का फोकस अब इसके ‘टैरिफ रोडमैप’ और सेक्टर-वार असर पर है। खबरों के मुताबिक, यह डील समय के साथ दोनों तरफ के बड़े हिस्से के व्यापार को टैरिफ-फ्री बनाने की दिशा में जाती है, हालांकि कुछ संवेदनशील क्षेत्रों को संरक्षण देने की रणनीति भी रखी गई है।

रिपोर्टों के अनुसार, इस समझौते से भारतीय निर्यातकों को यूरोपीय बाजार में बेहतर पहुंच और लागत में कमी का लाभ मिल सकता है, जबकि यूरोपीय कंपनियों के लिए भारत जैसे बड़े बाजार में प्रवेश और विस्तार आसान हो सकता है।
किन उद्योगों को संभावित फायदा
व्यापार समझौतों का लाभ सामान्यतः उन्हीं उद्योगों को सबसे पहले दिखता है जिनकी सप्लाई-चेन पहले से मजबूत होती है और जो मानक/अनुपालन (स्टैंडर्ड, टेस्टिंग, सर्टिफिकेशन) को जल्दी पूरा कर सकते हैं। खबरों में टेक्सटाइल, फार्मा, रत्न-आभूषण और विभिन्न औद्योगिक उत्पादों जैसे क्षेत्रों का उल्लेख संभावित लाभार्थी के रूप में किया गया है।
संवेदनशील क्षेत्रों पर ‘प्रोटेक्शन’ का संकेत
कुछ रिपोर्टों में कहा गया है कि डील में ऐसे सेक्टर भी हैं जिन्हें दोनों पक्ष संवेदनशील मानते हैं और जहां बाजार खोलने की गति धीमी या सीमित रखी जा सकती है। यह कदम घरेलू उद्योगों को अचानक प्रतिस्पर्धा से बचाने और समायोजन का समय देने के लिए लिया जाता है।
डील लागू होने पर कारोबार किन 3 चीज़ों पर नजर रखेगा
- टैरिफ कटौती की समय-सारिणी और किन HS कोड/उत्पादों पर कितना लाभ
- रूल्स ऑफ ओरिजिन और डॉक्यूमेंटेशन की जटिलता (कॉम्प्लायंस कॉस्ट)
- सेवाओं, निवेश और रेगुलेटरी मानकों पर व्यावहारिक दिशा-निर्देश