चीन में घटती बिक्री के बीच जर्मन कार कंपनियां भारत पर दांव लगा रहीं: क्या भारतीय बाजार भर पाएगा कमी?
चीन में इलेक्ट्रिक कारों की तेज़ बढ़त के बीच जर्मन कार ब्रैंड्स की बिक्री पर दबाव बढ़ा है. डीडब्ल्यू की रिपोर्ट बताती है कि अब जर्मन ऑटोमेकर्स की नजर भारत पर है. सवाल यह है कि भारत कितनी तेजी से और किस स्तर तक इस गिरावट की भरपाई कर सकता है.
डीडब्ल्यू की रिपोर्ट के अनुसार, दशकों से जर्मन कारें बेहतरीन इंजीनियरिंग और आर्थिक ताकत की पहचान रही हैं, लेकिन अब उनके सबसे बड़े बाजार चीन में बिक्री घट रही है. वजह यह बताई गई है कि चीन तेजी से इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर बढ़ रहा है और घरेलू चीनी ब्रैंड्स का दबदबा बढ़ता जा रहा है. ऐसे में जर्मन कंपनियां अब भारत को संभावित ‘अगले बड़े बाजार’ के तौर पर देख रही हैं.

रिपोर्ट में न्यूर्बुर्गरिंग रेस ट्रैक का उल्लेख करते हुए बताया गया है कि परफॉर्मेंस और इंजीनियरिंग जर्मन कार ब्रैंड्स की पहचान रही है. इसी विरासत के सहारे उन्होंने दुनिया भर में अपना ब्रैंड मजबूत किया. हालांकि अब यह ‘जादू’ कमजोर पड़ रहा है: बिक्री कम हो रही है, नौकरियों पर असर पड़ रहा है और लागत घटाने का दबाव बढ़ रहा है.
डीडब्ल्यू के मुताबिक, 2015 का ‘डीजलगेट’ कांड एक बड़ा झटका था, जिससे जर्मन ब्रांडों की साख को नुकसान पहुंचा. इसके बाद वैश्विक स्तर पर पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों की ओर रुझान तेज हुआ, लेकिन उसी समय टेस्ला जैसी कंपनियां इलेक्ट्रिक सेगमेंट में तेजी से आगे बढ़ती रहीं और जर्मन ऑटोमेकर्स अपेक्षाकृत धीमे रहे.
रिपोर्ट बताती है कि चीन लंबे समय तक जर्मन कंपनियों के लिए ‘सपनों की धरती’ रहा. लेकिन चीन ने योजनाबद्ध तरीके से पहले विदेशी भागीदारों से सीखने और फिर खुद आगे निकलने की रणनीति अपनाई. इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने वाले कानून, सब्सिडी और भारी निवेश के बाद चीन ईवी और बैटरी के क्षेत्र में अग्रणी बन गया है, जिससे जर्मन कंपनियों की हिस्सेदारी घट गई.
अब ध्यान भारत पर है, लेकिन यह चुनौतीपूर्ण भी है. भारत में कार बाजार बड़ा है, पर कीमत-संवेदनशीलता, ईवी इन्फ्रास्ट्रक्चर, चार्जिंग नेटवर्क, स्थानीय उत्पादन, टैक्स/नीतियां और प्रतिस्पर्धा जैसे कई कारक तय करेंगे कि जर्मन कंपनियां यहां कितनी तेजी से विस्तार कर पाएंगी. रिपोर्ट के मुताबिक, अहम सवाल यही है कि क्या भारत चीन में आई कमी को वास्तव में ‘पूरा’ कर पाएगा या केवल कुछ हिस्से की भरपाई संभव होगी.