महिला उद्यमियों के लिए बेंगलुरु बड़ा ग्रोथ हब, लेकिन लैंगिक भेदभाव बड़ी चुनौती
एक रिपोर्ट के मुताबिक बेंगलुरु महिला-नेतृत्व वाले स्टार्टअप्स के लिए भारत का सबसे मजबूत ग्रोथ हब बनकर उभरा है। हालांकि, ग्रोथ के बावजूद फंडिंग, अवसर और कार्यस्थल व्यवहार में लैंगिक भेदभाव जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं।
बेंगलुरु को महिला उद्यमियों के लिए भारत का सबसे मजबूत ग्रोथ हब बताया गया है। एक रिपोर्ट के अनुसार, इस शहर ने महिला-नेतृत्व वाले स्टार्टअप इकोसिस्टम के मामले में दिल्ली-एनसीआर और मुंबई जैसे बड़े केंद्रों को भी पीछे छोड़ दिया है।

रिपोर्ट में बेंगलुरु इनोवेशन रिपोर्ट (2025) का हवाला देते हुए कहा गया है कि 2010 से 2025 के बीच बेंगलुरु में सैकड़ों फीमेल-लेड स्टार्टअप सक्रिय रहे, और उन्होंने कुल मिलाकर अरबों डॉलर की फंडिंग जुटाई। यह संकेत देता है कि शहर में टैलेंट, निवेश नेटवर्क और स्टार्टअप-फ्रेंडली माहौल का मजबूत संयोजन मौजूद है।
इसके बावजूद, महिला उद्यमियों के सामने चुनौतियां खत्म नहीं हुई हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, लैंगिक भेदभाव एक बड़ी समस्या के रूप में सामने आता है—जो निवेशकों के व्यवहार, नेटवर्किंग अवसरों, नेतृत्व को लेकर धारणाओं और निर्णय लेने की प्रक्रियाओं तक में झलक सकता है।
स्टार्टअप ग्रोथ की कहानी केवल फंडिंग तक सीमित नहीं होती। स्केलिंग, टॉप-टैलेंट की भर्ती, बिजनेस डेवलपमेंट और मार्केट एक्सेस जैसे पहलुओं में भी संरचनात्मक बाधाएं महिलाओं पर असमान रूप से असर डाल सकती हैं।
विश्लेषकों के अनुसार, बेंगलुरु का एक प्लस पॉइंट यह है कि यहां टेक और सर्विस सेक्टर का बड़ा आधार है, जिससे नए बिजनेस के लिए शुरुआती ग्राहक और साझेदार मिलने की संभावना बढ़ती है। साथ ही, मेंटर्स और एक्सेलेरेटर नेटवर्क भी उद्यमियों को शुरुआती चरण में सहारा दे सकते हैं।
हालांकि, रिपोर्ट यह भी संकेत देती है कि यदि लैंगिक भेदभाव और अवसरों की असमानता पर संस्थागत स्तर पर काम नहीं हुआ, तो ग्रोथ की यह गति सभी उद्यमियों तक समान रूप से नहीं पहुंच पाएगी। इसलिए नीति, निवेश और कार्यस्थल संस्कृति—तीनों स्तरों पर सुधार की जरूरत बनी हुई है।