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रूसी तेल घटने के बाद रिलायंस की नजर वेनेजुएला पर: अमेरिकी मंजूरी की कोशिश

डीडब्ल्यू की रिपोर्ट के मुताबिक पश्चिमी दबाव के बीच रूस से तेल आयात घटाने/रोकने के बाद रिलायंस इंडस्ट्रीज वेनेजुएला से कच्चा तेल दोबारा खरीदने की संभावनाएं टटोल रही है। इसके लिए कंपनी अमेरिकी मंजूरी हासिल करने हेतु अमेरिकी विदेश और वित्त मंत्रालय से बातचीत कर रही है।

दैनिक समाचार न्यूज़ डेस्क

मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज के लिए कच्चे तेल की आपूर्ति रणनीति में बड़ा बदलाव चर्चा में है। डीडब्ल्यू की रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिमी दबावों के बीच रूस से तेल आयात रोकने/कम करने के बाद रिलायंस वेनेजुएला से कच्चा तेल फिर से खरीदने की दिशा में कदम बढ़ा सकती है।

रूसी तेल घटने के बाद रिलायंस की नजर वेनेजुएला पर: अमेरिकी मंजूरी की कोशिश
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रिपोर्ट में रॉयटर्स के हवाले से कहा गया कि इस उद्देश्य के लिए रिलायंस अमेरिकी सरकार से मंजूरी चाह रही है। भारतीय मीडिया रिपोर्टों का संदर्भ देते हुए बताया गया कि कंपनी के प्रतिनिधि अमेरिकी विदेश मंत्रालय और वित्त मंत्रालय के साथ चर्चा कर रहे हैं ताकि वेनेजुएला से तेल खरीद की अनुमति मिल सके।

खबर के मुताबिक, रिलायंस की जामनगर रिफाइनरी दुनिया की सबसे बड़ी रिफाइनरियों में से एक है और कंपनी की आपूर्ति सुरक्षा के लिए अलग-अलग स्रोतों से कच्चा तेल हासिल करना अहम रहता है। ऐसे में रूस से आयात में कमी आने पर वेनेजुएला एक विकल्प के तौर पर सामने आ सकता है—बशर्ते अमेरिकी नियमों/प्रतिबंधों के बीच वैधानिक अनुमति मिल सके।

डीडब्ल्यू की रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि वेनेजुएला के मामले में अमेरिकी अनुमति की जरूरत इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि वॉशिंगटन ने इस देश पर लंबे समय से कई प्रकार के प्रतिबंध लागू किए हैं। इस पृष्ठभूमि में रिलायंस की कोशिश यह है कि वह किसी संभावित ढांचे के तहत तेल खरीद को फिर से शुरू कर सके।

रिपोर्ट के अनुसार, मामले से परिचित सूत्रों ने यह भी बताया कि चर्चा का संदर्भ संभावित शिपमेंट/डील के आंकड़ों से जुड़ा हो सकता है, हालांकि किसी अंतिम समझौते की पुष्टि नहीं की गई।

तेल व्यापार में इस तरह की अनुमति-आधारित व्यवस्था अक्सर राजनीतिक घटनाक्रमों और प्रतिबंध नीति के उतार-चढ़ाव पर निर्भर करती है। इसलिए रिलायंस के लिए यह न सिर्फ ऊर्जा सुरक्षा का सवाल है, बल्कि नियामकीय और कूटनीतिक संतुलन का भी विषय है।

अगर मंजूरी मिलती है तो रिलायंस को अधिक विविध आपूर्ति स्रोत मिल सकते हैं और वह रूसी तेल पर निर्भरता कम करने की स्थिति में आ सकती है। दूसरी ओर, मंजूरी न मिलने पर कंपनी को अन्य बाजारों से वैकल्पिक बैरल्स जुटाने पड़ेंगे, जिसका असर लागत, लॉजिस्टिक्स और मार्जिन पर भी पड़ सकता है।

फिलहाल, डीडब्ल्यू रिपोर्ट के मुताबिक बातचीत जारी है और बाजार की नजर इस पर रहेगी कि अमेरिका किस प्रकार की अनुमति (या शर्तें) देता है।

स्रोत पुस्तिका

  1. DW हिंदीDW हिंदी